सत्ता और राजनीति

अब्बास ने 'इज़राइली क़दमों' का हवाला देकर फ़िलिस्तीनी चुनाव सितंबर 2027 तक स्थगित किए — क़ब्ज़े में फ़िलिस्तीनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया लगातार ठप

फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने शुक्रवार को एक फ़रमान जारी कर 28 नवंबर 2026 को प्रस्तावित विधायी चुनाव और अगले साल की शुरुआत में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव दोनों को 11 सितंबर 2027 तक स्थगित कर दिया। अब्बास ने इसका कारण इज़राइल की बस्ती-उपनिवेश हिंसा, सैन्य हमलों, आवाजाही पर प्रतिबंधों और फ़िलिस्तीनी कर-राजस्व की निरंतर कटौती को बताया; जबकि ग़ज़ा पट्टी के लिए उन्होंने 'विशेष सुरक्षा व मानवीय स्थिति', इज़राइली सेना की अधूरी वापसी और पुनर्निर्माण में प्रगति की कमी का हवाला दिया। यदि ये चुनाव

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फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने शुक्रवार को एक फ़रमान जारी कर 28 नवंबर 2026 को प्रस्तावित विधायी चुनाव और अगले साल की शुरुआत में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव दोनों को एक साथ 11 सितंबर 2027 तक स्थगित कर दिया। डॉयचे वेले की रिपोर्ट के अनुसार, अब्बास का 2009 में राष्ट्रपति कार्यकाल समाप्त होने के बाद से फ़िलिस्तीन में कोई राष्ट्रीय चुनाव नहीं हुआ है।

अब्बास ने अपने फ़रमान में स्थगन का कारण 'इज़राइली क़दमों से उत्पन्न बाधाओं' को बताया, जिनमें विशेष रूप से शामिल हैं: पश्चिमी तट और पूर्वी यरूशलम में बस्ती-उपनिवेशियों की हिंसा, सैन्य हमले, फ़िलिस्तीनियों की आवाजाही पर व्यवस्थित प्रतिबंध, तथा इज़राइल द्वारा फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण को हस्तांतरित की जाने वाली代理 कर-राजस्व का निरंतर रोक रखा जाना। ग़ज़ा पट्टी के संबंध में — डॉयचे वेले की रिपोर्ट के अनुसार इज़राइल का सैन्य अभियान तीन वर्षों से जारी है — फ़रमान में 'विशेष सुरक्षा व मानवीय स्थिति', इज़राइली सेना की अधूरी वापसी और युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण में प्रगति की कमी जैसे कारणों का हवाला दिया गया।

इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सा'आर ने तत्काल सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अब्बास के फ़रमान को 'ज़िम्मेदारी और जवाबदेही से बचने के लिए रचा गया एक और बेतुका झूठ' करार दिया। इज़राइल ने चुनावों को बाधित करने से इनकार किया है और ज़िम्मेदारी फ़िलिस्तीनी नेतृत्व पर डाली है। हालांकि, फ़रमान में उल्लिखित बस्ती-उपनिवेश हिंसा, आवाजाही पर प्रतिबंध और कर-राजस्व की कटौती — ये सब सीधे तौर पर क़ब्ज़ेबाज़ के रूप में इज़राइल के प्रशासनिक और सैन्य कृत्यों से उत्पन्न होते हैं; इन्हें फ़िलिस्तीन के आंतरिक शासन के मुद्दों के साथ जोड़कर रखना, क़ब्ज़ेबाज़ की ओर से फ़िलिस्तीनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के ढाँचागत हनन को छुपाता है।

अब्बास ने चुनाव कराने की प्रतिबद्धता पहले लिखित रूप में फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को सौंपी थी — यह फ़्रांस की पिछले वर्ष फ़िलिस्तीनी राज्य को औपचारिक मान्यता देने की प्रतिबद्धता का हिस्सा था। केवल कुछ ही हफ़्ते पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में, अब्बास ने अपने वीडियो संबोधन में इस वर्ष नवंबर में चुनाव समय पर कराने की पुनः पुष्टि की थी। फ़्रांस ने फ़िलिस्तीनी राज्य की मान्यता को फ़िलिस्तीन में चुनाव कराने से जोड़ दिया है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया मान्यता की पूर्वशर्त बन गई है; चुनाव हो पाएँगे या नहीं, इस पर इज़राइली क़ब्ज़े के क़दमों का निर्णायक प्रभाव इस बात को उजागर करता है कि मान्यता का ढाँचा सत्ता-संरचना से कतई नहीं जूझता।

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