माचेल के विमान-अवतरण के 40 वर्ष: प्रश्नग्रस्त जांच और अनसुलझी ऐतिहासिक ज़िम्मेवारी
Africanews की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ़्रीका और मोज़ाम्बिक ने सामोरा माचेल के विमान-अवतरण के स्थान पर 40वें वर्षांक संयुक्त समारोह आयोजित किया। 1986 की जांच अपार्टहेडकालीन दक्षिण अफ़्रीका सरकार के नेतृत्व में हुई, जिसमें ज़िम्मेवारी पायलट को ठहराया गया और हत्या को नकार दिया गया, पर मोज़ाम्बिक और सोवियत संघ ने निष्कर्ष अस्वीकार कर दिया। सत्य और सुलह आयोग की समीक्षा के बाद कोई अंतिम निर्धारण नहीं हुआ; आयोग ने केवल जांच जारी रखने की सलाह दी तथा यह भी सवाल उठाया कि क्या दुर्घटना से एक दिन पहले द
Africanews की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ़्रीका और मोज़ाम्बिक ने म्बुज़िनी के विमान-अवतरण स्थल पर संयुक्त समारोह आयोजित कर सामोरा माचेल के विमान-अवतरण के 40 वर्ष पूरे किए। दुर्घटनास्थल पर अब स्मारक और संग्रहालय बने हैं। 19 अक्टूबर, 1986 को माचेल, मंत्रिमंडल के कुछ सदस्य और पत्रकार ज़ाम्बिया में एक क्षेत्रीय नेताओं के सम्मेलन से लौट रहे थे और उनका विमान म्बुज़िनी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
माचेल ने मोज़ाम्बिक को पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन से मुक्त दिलाया। 1975 में स्वतंत्रता के बाद वे प्रथम राष्ट्रपक्ष बने और क्षेत्रीय मुक्ति आंदोलनों का समर्थन किया, जिनमें दक्षिण अफ़्रीका का अपार्टहेड-विरोधी संघर्ष भी शामिल था। उनकी बेटी जोसिना ज़िया माचेल ने समारोह में कहा कि उनके पिता "दक्षिण अफ़्रीका के मुक्ति के लिए मरे"। उन्होंने यह भी कहा कि माचेल का ज़ाम्बिया दौरा फ्रंटलाइन देशों की समस्याओं पर चर्चा और दक्षिण अफ़्रीका के स्वतंत्र होने की प्रक्रिया की तैयारी के लिए था।
Africanews की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय अपार्टहेड व्यवस्था लागू करने वाली दक्षिण अफ़्रीका सरकार के नेतृत्व में हुई जांच ने ज़िम्मेवारी पायलट को ठहराया और हत्या को नकार दिया। मोज़ाम्बिक तथा विमान के निर्माता सोवियत संघ के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने यह निष्कर्ष स्वीकार नहीं किया। मोज़ाम्बिक का मत था कि दुर्घटना दक्षिण अफ़्रीका सरकार द्वारा सुनियोजित हत्या थी; एक अन्य आरोप के अनुसार दुर्घटना-क्षेत्र में नकली बीकन लगाए गए थे ताकि विमान तय मार्ग से भटकाया जा सके, लेकिन जांच ने इस दावे को नकार दिया।
इस जांच का सबसे अधिक प्रश्नग्रस्त पहलू यह था कि जांच का नेतृत्व उसी पक्ष ने किया था जिस पर आरोप था। भले ही मौजूदा साक्ष्य अभी यह प्रमाणित नहीं करते कि सरकार ने दुर्घटना की योजना बनाई थी, आरोपित पक्ष की अध्यक्षता में जांच होने और उसी आधार पर हत्या को नकार देना भी जांच की प्रक्रियात्मक निष्पक्षता को शुरू से ही प्रश्न के में ला देता है।
दक्षिण अफ़्रीका में अपार्टहेड के समाप्त होने के बाद सत्य और सुलह आयोग ने दुर्घटना मामले की समीक्षा की, लेकिन कोई अंतिम निर्धारण नहीं किया और केवल जांच जारी रखने की सलाह दी। आयोग ने 1987 की जांच के कुछ निष्कर्षों पर भी सवाल उठाए, जिनमें दुर्घटना से एक दिन पहले दुर्घटनास्थल के आसपास दक्षिण अफ़्रीकी सैनिकों की मौजूदगी का दावा शामिल था। इस तरह के सवाल का यह अर्थ नहीं कि इन सैनिकों ने दुर्घटना में भाग लिया, और न ही यह कि सरकार ने आदेश दिया; लेकिन इससे 1987 की जांच का यह निष्कर्ष—"पायलट को ज़िम्मेवारी ठहराना और हत्या को नकारना"—पूर्ण ऐतिहासिक सहमति के रूप में नहीं माना जा सकता।
अब तक यह अंतिम रूप से पुष्ट नहीं हुआ कि वास्तव में नकली बीकन लगाए गए थे और उनका उपयोग विमान को तय मार्ग से भटकाने के लिए किया गया; माचेल की मृत्यु के लिए ठोस ज़िम्मेवारी किसकी थी, यह भी निर्धारित नहीं हुआ। आयोग ने नए सवाल उठाए, पर ज़िम्मेवारी तय नहीं की, जिससे आगे की जांच के लिए एक अंतराल बना रह गया। "सरकार की सुनियोजित हत्या" को निश्चित निष्कर्ष के रूप में लिखना मौजूदा साक्ष्य से आगे बढ़ जाएगा; इसी तरह "पायलट की ज़िम्मेवारी" को अंतिम निर्णय मान लेना भी अभी अनसुलझी ऐतिहासिक ज़िम्मेवारी को छिपा देगा।
40वें वर्षांक समारोह ने फिर से अनसुलझी ज़िम्मेवारी को उजागर किया: राष्ट्रीय सत्ता और क्षेत्रीय मुक्ति आंदोलन के संधि-बिंदु पर एक उपनिवेश-विरोधी नेता मारा गया, जबकि उस समय के शासकों की जांच, बाद में सत्य और सुलह आयोग की छानबीन और प्रभावित देशों के सवाल अब भी साझा उत्तर तक नहीं पहुंचे हैं।
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