विश्व और सुरक्षा

हूतियों ने यमन का मोखा बंदरगाह अपने कब्जे में लिया; ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद बाब अल-मंदब का महत्व बढ़ा

हूतियों का लाल सागर स्थित मोखा बंदरगाह पर कब्जा 2022 के युद्धविराम के बाद उनका सबसे बड़ा क्षेत्रीय लाभ है। बाब अल-मंदब से केवल 80 किलोमीटर दूर मोखा का महत्व फरवरी में ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के बाद बढ़ा है। पहले अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के नियंत्रण में रहे शहर का हाथ बदलना दशक से अधिक पुराने गृहयुद्ध के फिर व्यापक होने का खतरा पैदा करता है।

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The Hindu International ने एसोसिएटेड प्रेस के हवाले से बताया कि यमन के हूती लड़ाकों ने 10 सितंबर 2026 को लाल सागर के बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया। यह 2022 के युद्धविराम समझौते के बाद हूतियों का सबसे बड़ा क्षेत्रीय लाभ है और इससे एक दशक से अधिक समय से जारी यमन के गृहयुद्ध के फिर भड़कने का खतरा बढ़ गया है।

मोखा बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से लगभग 80 किलोमीटर दूर है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले इस समुद्री मार्ग से दुनिया के लगभग 12 प्रतिशत तेल और अन्य वस्तुओं का परिवहन होता है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर सैन्य हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन बाधित होने के बाद वैश्विक ऊर्जा मार्गों में बाब अल-मंदब का महत्व और बढ़ गया।

हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य हजम अल-असद और यमनी सरकार से संबद्ध नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज के कमांडर अहमद बाश ने अलग-अलग एसोसिएटेड प्रेस से शहर पर कब्जे की पुष्टि की। मोखा के निवासियों ने एजेंसी को बताया कि हूती लड़ाके पूरे शहर में फैल गए हैं और बाजार बंद हैं। इससे पहले शहर पर लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार की सेनाओं का नियंत्रण था।

मोखा का हाथ बदलना दस वर्षों के युद्ध से पहले ही पीड़ित यमनी नागरिकों के लिए संघर्ष के एक और दौर का खतरा लेकर आया है। युद्धविराम व्यवस्था टूटने का सबसे पहला असर रोजमर्रा के जीवन पर पड़ेगा। व्यापक ऊर्जा परिदृश्य में, फरवरी में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने होर्मुज में नौवहन बाधित किया, जिससे लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित इस संकरे समुद्री मार्ग पर वैश्विक आपूर्ति शृंखला का दबाव और बढ़ गया।

हूतियों के अगले सैन्य कदम और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं हैं। यह देखना बाकी है कि मोखा पर कब्जा पूर्ण गृहयुद्ध की वापसी को बढ़ावा देगा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन को प्रभावित करेगा या नहीं।

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