स्लोवेनिया के मतदाताओं ने जांसा के अधिकार विस्तार विधेयक को जनमत संग्रह में नकारा, राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री के सत्तावादी एजेंडे को झटका
एक बाध्यकारी जनमत संग्रह में, 51% स्लोवेनियाई मतदाताओं ने प्रधानमंत्री जांसा द्वारा प्रायोजित संसदीय जांच अधिकारों के विस्तार के विधेयक के विरुद्ध मतदान किया, जबकि 49% ने इसका समर्थन किया, और मतदान दर 53.7% रही जो ऐतिहासिक रूप से सर्वाधिक है। इस मामूली बहुमत ने उस विधान को नकार दिया जो गवाहों को तत्काल उपस्थित होने के लिए बाध्य करता तथा जांच समाप्त होने से पहले समन पर आपत्ति दर्ज करने के उनके अधिकार को छीनता, जो इस राष्ट्रवादी नेता के सत्तावादी सुधारों पर सीधा प्रहार है।
स्लोवेनिया के मतदाताओं ने रविवार को आयोजित एक बाध्यकारी जनमत संग्रह में 51% से 49% के मामूली बहुमत से प्रधानमंत्री जांसा की सरकार द्वारा प्रायोजित संसदीय जांच अधिकारों के विस्तार के विधेयक को नकार दिया। एएफपी और फ्रांस 24 की रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 99% मतों की मतगणना पूरी होने के बाद, विरोध में 51% और पक्ष में 49% मत पड़े, जबकि लगभग 1% मत अभी गिने जाने बाकी हैं, और अंतिम आंकड़ों में मामूली बदलाव हो सकता है।
इस विधेयक के पारित होने पर, संसद द्वारा गवाही देने के लिए बुलाए गए गवाहों को तत्काल उपस्थित होने के लिए बाध्य किया जाता, तथा जांच समिति का कार्य पूरा होने से पहले उन्हें समन के विरुद्ध अदालत में आपत्ति दर्ज करने का अधिकार नहीं होता। विपक्षी आलोचकों ने चेतावनी दी कि यह व्यवस्था गवाहों को संवेदनशील जानकारी का खुलासा करने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे संसदीय जांच सरकार के "राजनीतिक पुलिस" उपकरण में बदल सकती है।
मतदान दर 53.7% रही, जो मीडिया और विश्लेषकों की पूर्व अपेक्षाओं से काफी अधिक थी, तथा स्लोवेनिया के जनमत संग्रहों के इतिहास में सर्वाधिक रही। मतदान दर स्वयं एक राजनीतिक संकेत है—लगभग बीस लाख की आबादी वाले इस यूरोपीय संघ के सदस्य देश में, मतदाता घर से बाहर निकलकर सरकारी शक्ति के विस्तार की सीमाओं पर सीधा फैसला देने का विकल्प चुना।
विपक्षी नेता, उदारवादी पूर्व प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब ने मतदान से पहले चेतावनी दी थी कि स्लोवेनिया "लोकतांत्रिक लचीलेपन की वास्तविक परीक्षा" का सामना कर रहा है। उनकी चिंता निराधार नहीं है: जांसा स्वयं राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी हैं, और इस वर्ष मार्च में हुए संसदीय चुनावों में उदारवादी गठबंधन यद्यपि मामूली बहुमत से जीता, लेकिन वह सरकार बनाने में सफल नहीं हो सका, जिसके परिणामस्वरूप जांसा ने सत्ता सँभाली।
फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, यह राष्ट्रवादी नेता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशंसक हैं, तथा उन्होंने "सस्ता लेकिन उच्च गुणवत्ता वाला देश" बनाने का वादा किया है। उनकी नीतिगत योजना में सार्वजनिक क्षेत्र के पदों में कटौती तथा अधिकार समूहों के वित्तपोषण में कमी शामिल है, जिन्हें राजनीतिक विरोधियों की आलोचना का सामना करना पड़ा है।
जनमत संग्रह में मामूली अंतर और रिकॉर्ड मतदान ने इनकार के परिणाम को मतगणना के अंतर से अधिक राजनीतिक भार प्रदान किया है। जांसा सरकार की अगली प्रतिक्रिया—चाहे विधायी मार्ग में बदलाव कर समझौते की खोज हो, या आगे बढ़ने का विकल्प हो—इस राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री के शासन की दिशा का आकलन करने का प्रमुख मानदंड होगी।
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