नीति और शासन

तालिबान के मानवाधिकारों की निंदा कर फिर उससे निर्वासन में मदद मांगना: यूरोपीय प्रवासन नीति की संरचनात्मक दरार

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जो यूरोपीय देश खुलेआम तालिबान सरकार के मानवाधिकार रिकॉर्ड की निंदा करते हैं, वे अफगान शरणार्थियों को वापस भेजने में तालिबान की मदद ले रहे हैं। तालिबान यूरोप के प्रवास-भय का सौदेबाज़ी के तौर पर इस्तेमाल कर पश्चिमी कूटनीति और घरेलू नीति के बीच की दरार को सामने ला रहा है।

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न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जो यूरोपीय देश सार्वजनिक मंचों पर तालिबान सरकार के मानवाधिकार रिकॉर्ड की निंदा करते हैं, वे अफगान शरणार्थियों को वापस भेजने में तालिबान की मदद ले रहे हैं। इस खुलासे ने यूरोपीय प्रवासन नीति में 'मानवाधिकार प्रतिबद्धता' और 'वास्तविक कार्यान्वयन' के बीच की दरार को सामने ला दिया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स बताता है कि तालिबान यूरोप के प्रवास-भय को सौदेबाज़ी के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। जहां यूरोप के कई देश संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न मानवाधिकार मंचों पर तालिबान की महिलाओं पर व्यवस्थित दमन और प्रेस स्वतंत्रता कुचलने की आलोचना जारी रखे हुए हैं, वहीं उनके गृह और प्रवास विभाग उसी शासन से सक्रिय रूप से संपर्क साध रहे हैं, ताकि निर्वासन सहयोग के बदले सीमा नियंत्रण की सुविधा हासिल की जा सके। जब घरेलू राजनीतिक दबाव निर्वासन को प्राथमिक मुद्दा बना देता है, तो काबुल का मानवाधिकार मुद्दा पीछे चला जाता है—यूरोप की सार्वजनिक मंचों पर की गई मानवाधिकार निंदा इस शक्ति सौदेबाज़ी में अब आत्म-संगत नहीं रह जाती।

इस सौदेबाज़ी से सीधे प्रभावित वे अफगानी हैं, जो यूरोपीय देशों में शरण आवेदन के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं। वे तालिबान शासन में सबसे अधिक जोखिम वाला समूह हैं, फिर भी सबसे पहले 'निर्वासित' की स्थिति में धकेल दिए जा रहे हैं।

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