कैमरून के अंग्रेज़ीभाषी क्षेत्र में शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र पर हमला: एक पुलिसकर्मी की मौत, पांच शिक्षक अगवा
कैमरून के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के वुम शहर में एक शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र पर हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया। उन्हें रोकने की कोशिश करने वाले एक पुलिसकर्मी की मौके पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई और पांच शिक्षकों को अगवा कर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। यह हमला अलगाववादी नेताओं द्वारा नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत रोकने के लिए बंद घोषित किए जाने के बीच हुआ और औपनिवेशिक दौर के ब्रिटिश-फ्रांसीसी विभाजन से उपजे संघर्ष में शिक्षकों तथा नागरिकों को लगातार हो रहे नुकसान को रेखांकित करता है।
अल जज़ीरा के अनुसार, कैमरून के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के प्रशासनिक प्रमुख एडोल्फ लेले लाफ्रीक ने 9 तारीख को एएफपी को बताया कि हथियारबंद लोगों के एक समूह ने मंगलवार सुबह वुम शहर के एक शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र में “घुसपैठ” की। वुम, बामेंडा शहर से लगभग 80 किलोमीटर उत्तर में है। मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी ने हमलावरों को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उस पर “गोलियों की बौछार” कर दी और उसकी वहीं मौत हो गई। इसके बाद पांच शिक्षकों को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। सुरक्षा बल हमलावरों की तलाश कर रहे हैं और अगवा शिक्षकों का अब तक कोई पता नहीं चला है।
वुम जिस उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है, वह कैमरून के दो अंग्रेज़ीभाषी क्षेत्रों में से एक है। 2017 से अलगाववादी सशस्त्र समूहों और याउंडे की सरकार के बीच संघर्ष लगभग एक दशक से जारी है। इस सप्ताह की शुरुआत में उत्तर-पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी अंग्रेज़ीभाषी क्षेत्रों के अलगाववादी नेताओं ने नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत बाधित करने के उद्देश्य से बंद की घोषणा की थी। शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र पर हमला इसी पृष्ठभूमि में हुआ। हमलावरों की सटीक पहचान अभी स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट में उन्हें केवल “हथियारबंद लोग” कहा गया है और घटना को अलगाववादियों द्वारा स्कूलों की शुरुआत के समय घोषित बंद के संदर्भ में रखा गया है, लेकिन इसका सीधा दोष किसी विशेष संगठन पर नहीं लगाया गया है।
इस संघर्ष की जड़ें औपनिवेशिक विरासत में गहराई तक धंसी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के बाद राष्ट्र संघ ने कैमरून को ब्रिटेन और फ्रांस के प्रशासन के बीच बांट दिया था। इस तरह अंग्रेज़ीभाषी और फ्रांसीसीभाषी क्षेत्रों को कृत्रिम रूप से जोड़ दिया गया और यह व्यवस्था आज तक चली आ रही है। देश की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा अंग्रेज़ीभाषी क्षेत्रों में रहता है और लंबे समय से फ्रांसीसी भाषा के प्रभुत्व वाली केंद्र सरकार के अधीन है।
2016 के अंत में कैमरून सरकार ने अंग्रेज़ीभाषी क्षेत्रों के उन शिक्षकों और वकीलों के प्रदर्शनों को हिंसक ढंग से दबा दिया था, जो शिक्षा और न्याय व्यवस्था पर फ्रांसीसीभाषी अधिकारियों के बढ़ते नियंत्रण का विरोध कर रहे थे। उस समय सड़कों पर उतरे शिक्षक — वही पेशेवर समुदाय जिससे आज अगवा किए गए लोग आते हैं — मातृभाषा में शिक्षा और स्थानीय न्यायिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे थे। दूसरे शब्दों में, आज हमलों का निशाना बन रहा शिक्षक समुदाय ही एक दशक पहले शुरू हुए विरोध आंदोलन के केंद्र में था।
सरकारी दमन मांगों को शांत नहीं कर सका; उलटे, उसने अगले वर्ष अलगाववादी सशस्त्र संघर्ष को भड़का दिया। बीते दशक में नागरिक अपहरण, फिरौती और हिंसा के सबसे बड़े शिकार बने हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2016 से अब तक संघर्ष में कम से कम 6,000 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले वर्ष कैमरून में 3,30,000 से अधिक लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए और लगभग 1,00,000 लोग पड़ोसी नाइजीरिया भाग गए। वुम के शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र पर हमले के दिन अगवा किए गए पांचों शिक्षक उसी समुदाय से हैं जिसने एक दशक पहले अंग्रेज़ीभाषी क्षेत्रों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई थी। वे सुरक्षित लौट पाएंगे या नहीं, इसका अब तक कोई जवाब नहीं है।
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