सत्ता और राजनीति

नाटो प्रमुख: फ्रांस के चुनाव नतीजे चाहे जो हों, गठबंधन मजबूत रहेगा और यूक्रेन समर्थन जारी रहेगा

नाटो महासचिव मार्क रुटे ने 10 सितंबर को बर्लिन में कहा कि रूस के खतरे के सामने गठबंधन को भोला नहीं होना चाहिए और अगले वर्ष फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम चाहे जो हो, नाटो एकजुट और मजबूत रहेगा। यह बयान मरीन ले पेन की बढ़ती चुनावी संभावनाओं और सैक्सोनी-आनहाल्ट में जर्मनी की दक्षिणपंथी एएफडी की बड़ी जीत के बीच आया है।

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नाटो महासचिव मार्क रुटे ने 10 सितंबर को बर्लिन में जर्मन राजदूतों के सम्मेलन में कहा कि अगले वर्ष फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम चाहे जो हो, 32 सदस्यीय सैन्य गठबंधन मजबूत रहेगा। उन्होंने रूस से पैदा होने वाले कथित खतरे के सामने नाटो को भोला न बनने की चेतावनी दी।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इस बयान का स्पष्ट राजनीतिक निशाना था। सर्वेक्षणों में फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन के राष्ट्रपति बनने की संभावना सबसे मजबूत दिख रही है। वह फ्रांस की नाटो भूमिका और यूक्रेन को दिए जा रहे समर्थन पर पहले ही सवाल उठा चुकी हैं। जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी ने सैक्सोनी-आनहाल्ट के चुनाव में भारी जीत हासिल की, जिससे राजनीतिक समीकरण हिल गया।

रुटे ने जर्मन राजनयिकों से कहा, अगले मई में फ्रांस में चुनाव होंगे और नतीजा चाहे जो हो, नाटो वहां मौजूद, एकजुट और मजबूत रहेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव में जो भी जीतेगा, वह रक्षा निवेश और यह सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर दिशा कायम रखेगा कि यूक्रेन यह युद्ध न हारे।

रुटे ने रूस को दीर्घकालिक खतरा बताया और कहा कि नाटो को भोला नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गठबंधन किसी भी निर्वाचित नेता के साथ काम करेगा और राजनीति की तुलना प्रतिस्पर्धी खेल से करते हुए सरकारों को आवश्यक आर्थिक सुधारों पर कायम रहने की सलाह दी। उनके शब्दों में, दिशा पर कायम रहना हमेशा सबसे अच्छा विकल्प है।

एएफडी की जीत पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए रुटे ने कहा कि यह ऐसी बात नहीं है जिस पर उन्हें टिप्पणी करनी चाहिए। दस वर्ष से अधिक समय तक नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रहे रुटे के नेतृत्व में नाटो खुद को चुनावी चक्रों से ऊपर स्थिरता की शक्ति के रूप में पेश करता है। लेकिन इसका अर्थ यह भी है कि गठबंधन का सैन्यीकरण और यूक्रेन सहायता नीति ऐसी तय दिशा बन चुकी है जिसे कोई लोकतांत्रिक फैसला बदल नहीं सकता। ले पेन के जीतने पर इस दिशा में बदलाव और नाटो तथा यूक्रेन समर्थन की कीमत पर फ्रांसीसी मतदाताओं का फैसला नीति में बदल पाएगा या नहीं, यह अभी अनिश्चित है।

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