विश्व भर में मृत्युदंड की संख्या बढ़ रही है: मृत्युदंड के विरुद्ध विश्व दिवस के पीछे राज्य की हिंसा की सीमाएं
10 अक्टूबर को मृत्युदंड के विरुद्ध विश्व दिवस है। फ्रांस 24 समाचार चैनल के अनुसार, विश्व भर में मृत्युदंड की संख्या बढ़ रही है। इस सप्ताह यूरोपीय संघ ने मृत्युदंड को 'क्रूर और अपमानजनक दंड का एक रूप' बताकर निंदा की, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि सभी देशों के नेताओं की इस पर एक ही राय नहीं है। कार्यक्रम ने 'डेथ रो कहानियां' के प्रस्तुतकर्ता फ्रांसुआ पिकार्ड को इस विषय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया।
10 अक्टूबर को मृत्युदंड के विरुद्ध विश्व दिवस है। फ्रांस 24 समाचार चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व भर में मृत्युदंड की संख्या बढ़ रही है।
फ्रांस 24 समाचार चैनल की रिपोर्ट में बताया गया कि इस सप्ताह यूरोपीय संघ ने मृत्युदंड को 'क्रूर और अपमानजनक दंड का एक रूप' बताकर निंदा की, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि 'सभी विश्व नेताओं की एक ही राय नहीं है'। कार्यक्रम ने 'डेथ रो कहानियां' के प्रस्तुतकर्ता फ्रांसुआ पिकार्ड को मृत्युदंड की संख्या बढ़ने के कारणों पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया।
यूरोपीय संघ का यह विरोध उसके मानवाधिकार एजेंडे का हिस्सा है। लेकिन व्यवहार में, जब रणनीतिक सहयोगी मृत्युदंड को बरकरार रखते हैं या इसके दायरे को और बढ़ाते हैं, तो यूरोपीय संस्थानों की आलोचना की आवाज़ काफी धीमी हो जाती है। इस प्रकार मानवाधिकारों का प्रवचन एक सशर्त उपकरण बन जाता है—मानदंड यह निर्धारित करते हैं कि विषय यूरोपीय संघ के हितों से कितना दूर है, न कि राज्य की हिंसा की मूलभूत अस्वीकृति।
मृत्युदंड की संख्या में वृद्धि का वास्तविक संकेत यह है कि राज्य द्वारा हत्या की शक्ति का सामान्यीकरण हो रहा है। प्रत्येक मृत्युदंडित व्यक्ति के पीछे एक संकुचित बचाव का अवसर है, बंद हुए अंतरराष्ट्रीय निगरानी चैनल हैं, और राज्य की हिंसा को कानून के शासन के रूप में प्रस्तुत करने की प्रक्रियात्मक कथा है। मृत्युदंड के विरुद्ध विश्व दिवस की स्मारक सभाएं, यूरोपीय संघ के निंदा वक्तव्य, कार्यक्रम में पाहुनों के साथ चर्चा का ढांचा—इनमें से किसी ने भी मूल मुद्दे को नहीं छुआ है: कानून के नाम पर नागरिकों के जीवन को छीनने की राज्य की शक्ति दुनिया के कई हिस्सों में लगातार बढ़ रही है।
अभी कोई टिप्पणी नहीं। चर्चा शुरू करें।