विश्व और सुरक्षा

दो से 180 से अधिक ऊंची चिमनियां: अमेरिकी उच्च-वायुमंडलीय प्रसार नीति ने स्थानीय अनुपालन को सीमा-पार अम्लीय वर्षा में कैसे बदला

1970 से 1985 के बीच अमेरिका में 500 फुट से ऊंची औद्योगिक चिमनियां दो से बढ़कर 180 से अधिक हो गईं। बिजली कंपनियों ने स्रोत पर नियंत्रण के बजाय प्रदूषकों को ऊंचाई पर फैलाया, जिससे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड ने अंतरराज्यीय व सीमा-पार अम्लीय वर्षा पैदा की। 2000 के दशक के अंत तक भी 56% संबंधित कोयला बॉयलरों में डीसल्फराइजेशन और 63% में उन्नत नाइट्रोजन ऑक्साइड नियंत्रण नहीं था।

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The Times of India के विश्व संस्करण के अनुसार, 1970 के दशक में अमेरिका की बिजली कंपनियों ने जमीन-स्तर की नई वायु गुणवत्ता सीमाओं का पालन करने के लिए एक ऐसा तरीका विकसित किया जो देखने में चतुर था, लेकिन जिसकी कीमत दूसरों ने चुकाई: 500 फुट से अधिक ऊंची विशाल चिमनियां बनाकर सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड को अधिक ऊंची और तेज वायु धाराओं में छोड़ना। “प्रसार” कही जाने वाली इस रणनीति ने प्रदूषकों को बिजलीघरों के आसपास जमने से तो रोका, लेकिन उन्हें प्रचलित हवाओं के सहारे राज्यों और देशों की सीमाएं पार करवा दीं और यह उत्तरी अमेरिका में अम्लीय वर्षा का संकट बन गया।

अमेरिकी गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस ने “वायु गुणवत्ता: ऊंची चिमनियां और अंतरराज्यीय वायु प्रदूषण परिवहन में उनका योगदान”, GAO-11-473, शीर्षक वाली जांच रिपोर्ट में इस बदलाव को दर्ज किया। 1970 में पूरे अमेरिका में 500 फुट से ऊंची केवल दो औद्योगिक चिमनियां थीं; 1985 तक इनकी संख्या 180 से अधिक हो गई। महंगे फ्ल्यू-गैस डीसल्फराइजेशन स्क्रबर या स्रोत पर अन्य फिल्टर लगाने के बजाय बिजलीघरों ने “ऊंचाई पर तनुकरण” का सहारा लिया: संयंत्र के आसपास जमीन पर प्रदूषक की सांद्रता मानक के भीतर हो, तो उसे अनुपालन मान लिया जाता था।

असली कीमत सैकड़ों, यहां तक कि हजारों मील दूर हवा के बहाव की दिशा में स्थित क्षेत्रों ने चुकाई। अमेरिका की लगभग एक-तिहाई ऊंची चिमनियां ओहायो नदी घाटी के पांच राज्यों—इलिनॉय, इंडियाना, ओहायो, पेंसिल्वेनिया और वेस्ट वर्जीनिया—में केंद्रित थीं, जो कोयला बिजली उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं। पश्चिम से चलने वाली प्रचलित हवाओं के सहारे इन बिजलीघरों से निकले अम्लीय पदार्थ पूर्व और उत्तर की ओर बह गए। उन्होंने न्यूयॉर्क के एडिरॉन्डैक पर्वत और न्यू इंग्लैंड की झीलों का रासायनिक संतुलन बिगाड़ा, ऊंचाई वाले जंगलों की मिट्टी से महत्वपूर्ण पोषक तत्व निकाल दिए और ऊंचे क्षेत्रों में लाल स्प्रूस वृक्षों की बड़े पैमाने पर मृत्यु का कारण बने।

सीमा-पार प्रदूषण ने अमेरिका और कनाडा के बीच गंभीर कूटनीतिक तनाव पैदा किया। The Times of India के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी बिजलीघरों का उत्सर्जन लंबी दूरी तय करके कनाडा पहुंचा और ओंटारियो तथा क्यूबेक की हजारों झीलों को अम्लीय बना दिया। 1980 के दशक में वाशिंगटन और ओटावा के बीच एक बड़े विवाद में बदले इस पर्यावरणीय संघर्ष ने एक कठोर तर्क उजागर किया: जब कोई देश स्थानीय सांद्रता मानक पूरा करने को अनुपालन का अंतिम लक्ष्य मानता है, तो उसकी “स्वच्छता” पूरी तरह पड़ोसी देश की पारिस्थितिक कीमत पर टिकी हो सकती है।

नियमन की सुस्ती ने इस अन्याय को और बढ़ाया। 1977 में अमेरिकी कांग्रेस ने स्वच्छ वायु अधिनियम की धारा 123 में संशोधन करके चिमनी की ऊंचाई सीमित करने के लिए “अच्छी इंजीनियरिंग प्रथा”, GEP, का नियम जोड़ा, ताकि “ऊंची चिमनी से अनुपालन” के शॉर्टकट को रोका जा सके। फिर भी पहले बनी कई ऊंची चिमनियां आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के बिना दशकों तक चलती रहीं। अकाउंटेबिलिटी ऑफिस की रिपोर्ट में सामने आया कि 2000 के दशक के अंत तक भी ऊंची चिमनियों से जुड़े 56 प्रतिशत कोयला बॉयलरों में डीसल्फराइजेशन स्क्रबर नहीं थे और 63 प्रतिशत में उन्नत नाइट्रोजन ऑक्साइड नियंत्रण नहीं था। इनमें से अधिकांश अनियंत्रित इकाइयां 1980 से पहले के निर्माण उछाल के दौरान बनी थीं।

वास्तविक नीतिगत मोड़ 1990 में आया। उस वर्ष स्वच्छ वायु अधिनियम में हुए संशोधनों ने “अम्लीय वर्षा कार्यक्रम” बनाया, जिसने बिजली कंपनियों को प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने या कम सल्फर वाले कोयले का उपयोग करने के लिए बाध्य किया। अंततः कार्यक्रम ने क्षेत्रीय सल्फर उत्सर्जन को 80 प्रतिशत से अधिक घटा दिया। इससे साबित हुआ कि प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण में उत्सर्जन को स्रोत पर पकड़ना जरूरी है, न कि निकास गैसों को केवल अधिक ऊंचाई पर भेज देना।

“प्रसार पद्धति” से “अम्लीय वर्षा कार्यक्रम” तक, दो दशक से अधिक का यह नियामक इतिहास एक परिचित ढांचा दिखाता है: जब अनुपालन की लागत भौगोलिक और राजनीतिक रूप से कमजोर पक्षों—हवा के बहाव की दिशा वाले राज्यों, पड़ोसी देशों या मतदान अधिकार से वंचित पारिस्थितिक तंत्रों—पर डाली जा सकती है, तो प्रदूषक “मानक पूरा करने” को “समस्या सुलझाने” के बराबर मानते हैं और तनुकरण को नियंत्रण समझ लेते हैं।

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