विश्व और सुरक्षा

अल्बानी में युवा विरोध उगरा: आँसू गैस, कम से कम 167 गिरफ्तार; रामा सरकार की वैधता पर दबाव

अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अल्बानिया की राजधानी तिराना में हजारों युवा प्रदर्शकों के बैरिकेड पार करने की कोशिश के दौरान पुलिस ने आँसू गैस चलाई। पुलिस ने वॉटर कैनन और रबर बुलेट भी इस्तेमाल किए; कम से कम 167 लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें नाबालिग शामिल हैं। माध्यमिक विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के छात्रों के शामिल होने के बाद ट्यूशन फी, सार्वजनिक शिक्षा और छात्रावास की स्थितियों को लेकर असंतोष ने विरोध फैला दिया। प्रदर्शकों ने प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे और "तकनीकी सरकार" के गठन की माँग रखी

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अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अल्बानिया की राजधानी तिराना में लगातार कई दिनों तक सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। पुलिस ने बैरिकेड पार करने की कोशिश कर रहे हजारों युवा प्रदर्शकों पर आँसू गैस चलाई और भीड़ को हटाने के लिए वॉटर कैनन तथा रबर बुलेट का इस्तेमाल किया; कम से कम 167 लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें नाबालिग भी शामिल थे। माध्यमिक विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के छात्रों के शामिल होने के साथ ट्यूशन फी में वृद्धि, सार्वजनिक शिक्षा सुविधाओं और छात्रावास की स्थितियों में खराबी जैसे मुद्दे सड़कों पर उभरे। प्रदर्शकों ने प्रधानमंत्री एडी रामा के तुरंत इस्तीफा देने तथा "तकनीकी सरकार" बनाने की माँग रखी और सरकार के प्रस्तावित संवाद को भी अस्वीकार कर दिया।

यह आंदोलन मई में विलासिता वाली विकास परियोजनाओं के विरोध से उभरे "फ्लेमिंगो क्रांति" से विकसित हुआ। विवाद ज़्वेर्नेट्स के संरक्षित तट और साज़ान द्वीप पर बनने प्रस्तावित रिसॉर्ट परियोजना से जुड़ा था। अल-जज़ीरा के अनुसार, साज़ान द्वीप परियोजना में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जैरेड कुश्नर के स्वामित्व वाली कंपनी का निवेश शामिल था; यह अमेरिकी निजी पूंजी की परियोजना है, अमेरिकी सरकार की नीति नहीं। इसी समय, सोशल मीडिया पर रामा सरकार द्वारा राष्ट्रीय हित को निजी हित, व्यक्तिगत सत्ता या विदेशी हित—जिसमें इज़राईली हित का दावा भी शामिल है—से नीचे रखने के आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं। रामा ने इन आरोपों को "विदेशी हाथ" द्वारा फैलाए गए षड्यंत्र सिद्धांत और गलत सूचना कहकर खारिज कर दिया।

TV Klan के संपादक फातोस हाकोरिया ने अल-जज़ीरा से कहा कि अब तक यह स्पष्ट है कि विरोध मुख्यतः युवाओं द्वारा स्वयं संगठित किया गया है। हाकोरिया ने कहा कि गतिशील समन्वय मुख्यतः WhatsApp, Telegram और Snapchat जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों के ज़रिए हुआ, औपचारिक संगठनात्मक पदानुक्रम के ज़रिए नहीं। राजनीतिक विश्लेषक बेन अंदोनी ने इसे "क्षैतिज आंदोलन" कहा और बताया कि प्रतिभागी मुख्य रूप से TikTok समूहों और सोशल नेटवर्क से सक्रिय किए गए, न कि किसी औपचारिक सांस्कृतिक या राजनीतिक संगठन के निर्देशन में। आंदोलन के पीछे किसी एकीकृत संगठन के होने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। अंदोनी ने भ्रष्टाचार, रिश्तेदारों को नौकरी देने की प्रवृत्ति और भविष्य को लेकर अविश्वास को गहरे कारणों में गिनाया।

प्रदर्शकों ने सत्ताधारी समाजवादी दल और साली बेरिशा के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक दल—दोनों को ही अस्वीकार कर दिया। विपक्ष के नेताओं का मैदान पर नियंत्रण नहीं था और भीड़ से बात करने की कोशिश करने वाले कई विपक्षी सांसदों को खुला विरोध झेलना पड़ा। प्रदर्शकों के इस इनकार से पता चलता है कि वे मौजूदा दो बड़े दलों द्वारा प्रतिनिधित्व स्वीकार नहीं करते; इससे सरकार को ऐसा कोई एक प्रतिनिधि नहीं मिला जिससे वह संवाद कर सके। राष्ट्रीय संस्थाओं पर विश्वास की इस टूटी के कारण संवाद के प्रस्ताव को स्वीकार करने वाला कोई स्पष्ट पक्ष नहीं बचा। अंदोनी के अनुसार, क्षैतिज संरचना रामा सरकार के लिए दबाव भी है और यह कारण भी कि सरकार प्रदर्शकों से बातचीत कर पाने में असमर्थ है।

संवाद से मना कर देने वाले प्रदर्शकों के सामने रामा सरकार अधिकतर पुलिसबल पर निर्भर रही है। रिपोर्ट में पुलिस द्वारा विभिन्न चरणों में वॉटर कैनन और रबर बुलेट के इस्तेमाल की वैधता को बिंदु-दर-बिंदु स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया। बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी और संघर्ष जारी रहने के बीच रामा ने फ्रंटलाइन पुलिसकर्मियों को 2,500 यूरो के बोनस की घोषणा की और 2027 में पुलिस वेतन बढ़ाने की योजना बनाई। हाकोरिया के मानने में सरकार इस संकट को मुख्यतः सार्वजनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था का मामला मान रही है। अंदोनी ने सीधे कहा: "प्रदर्शक लगातार और दृढ़ हैं, जबकि रामा पुलिस के ज़रिए बलवानी का कार्ड खेल रहा है।" उनके मूल्यांकन में नियंत्रण बनाए रखने का मुख्य साधन अब पुलिसबल है, संवाद नहीं; और इससे सरकार की नैतिक प्रामाणिकता तथा वैधता में गंभीर गिरावट आई है।

अल-जज़ीरा ने यह भी बताया कि समाजवादी दल के मुख्यालय में लाठियों लिए, पहचान अज्ञात लोग कभी आए थे। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शकों द्वारा दलभवन पर पत्थर फेंकने पर वे इमारत की रक्षा के लिए रहे थे और इनमें सार्वजनिक पद धारण करने वाले लोग भी शामिल थे। रिपोर्ट ने इन लोगों की पहचान या किस प्राधिकार से वे कार्य कर रहे थे, यह स्पष्ट नहीं किया। इसलिए अनौपचारिक सुरक्षा बल और औपचारिक पुलिस व्यवस्था के बीच की सीमा और भी धुंधली हो गई है।

विश्लेषकों का मानना है कि थकान कुछ युवाओं को अस्थायी रूप से सड़कों से हटने पर मजबूर कर सकती है, जिससे सरकार की वैधता, क्षमता और सुधार की इच्छा साबित करने की ज़िम्मेदारी रामा पर रह जाएगी। लेकिन स्पष्ट नेतृत्व के अभाव का मतलब यह भी है कि आंदोलन का कम होना ज़रूरी नहीं कि विरोध विफल हो गया हो। पुलिस के तौर-तरीकों से अभी केवल मौदान की भीड़ हटाई जा सकती है; वातचीत का रास्ता अभी नहीं खुला है। इस विरोध ने युवाओं और राजनीतिक प्रतिष्ठान के बीच की दरार को सार्वजनिक कर दिया है। यह थकान के साथ पीछे खिंचेगा या अल्बानिया की मौजूदा पार्टी प्रणाली के लिए अधिक दीर्घकालिक चुनौती बनेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि आंदोलन की संगठनात्मक क्षमता लगातार उत्पीड़न सहन कर पाती है या नहीं।

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