फ्रांस में BAPS पर बढ़ी सार्वजनिक पड़ताल: पेरिस के पास विशाल मंदिर की मंज़ूरी पर उठे सवाल
France 24 के अनुसार, इस सप्ताह एफिल टावर पर हुई हड़ताल के कारण BAPS फ्रांस की मुख्यधारा की चर्चा में आया। फ्रांस में रहने वाले भारतीय लंबे समय से धुर-दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों पर जनता का ध्यान खींचने की कोशिश करते रहे हैं। अब फ्रांसीसी जनता पूछ रही है कि BAPS को पेरिस के पास विशाल मंदिर बनाने की अनुमति कैसे मिली और पहले उठी चिंताएं व्यापक बहस क्यों नहीं बन सकीं।
इस सप्ताह पेरिस के एफिल टावर पर हुई एक हड़ताल ने हिंदू संप्रदाय BAPS को फ्रांस की मुख्यधारा की सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। France 24 के अनुसार, फ्रांस में रहने वाले उन भारतीय समुदायों के लिए यह ध्यान बहुत देर से आया है, जो लंबे समय से धुर-दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों के बारे में जनचेतना बढ़ाने की कोशिश करते रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में BAPS पांच वर्ष से अधिक समय से जांच और सार्वजनिक पड़ताल के दायरे में है। लेकिन फ्रांस में ऐसे ही सवाल लंबे समय तक सार्वजनिक बहस का हिस्सा नहीं बन सके। अब फ्रांसीसी विमर्श का मुख्य प्रश्न उलटकर यह है कि संगठन को पेरिस के पास एक विशाल मंदिर बनाने की मंज़ूरी कैसे मिली और पहले उठाए गए संदेह व्यापक स्तर क्यों नहीं पकड़ सके।
France 24 ने इस समय-अंतर को ही जांच के केंद्र में रखा है। जब अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताएं लगातार मौजूद थीं और अमेरिका में वर्षों की सार्वजनिक पड़ताल का रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध था, तब फ्रांस की अनुमति प्रक्रिया और सार्वजनिक प्रतिक्रिया तंत्र पहले सक्रिय क्यों नहीं हुए? इस देरी के पीछे अल्पसंख्यक समुदायों की निरंतर आवाज़ और सार्वजनिक निगरानी की संस्थागत व्यवस्था के बीच एक संरचनात्मक असंगति उजागर होती है।
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