पेरिस के रिपब्लिक स्क्वेयर और ले हॉल शॉपिंग क्षेत्र में कर्फ्यू, सभा-प्रदर्शन पर रोक तीन घंटे पहले
Africanews के अनुसार, पेरिस पुलिस ने रिपब्लिक स्क्वेयर और ले हॉल शॉपिंग क्षेत्र में रात का कर्फ्यू लागू किया है, जो सोमवार रात 11 बजे से मंगलवार सुबह 6 बजे तक चलेगा; दोनों स्थानों पर रात 8 बजे से सभा और प्रदर्शन पर प्रतिबंध है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिंसा के घटनाएं पूरे फ्रांस तक पहुंच चुकी हैं। कदम भौगोलिक रूप से सीमित हैं, लेकिन सभा-प्रदर्शन प्रतिबंध का दायरा अधिक है; इसका कानूनी आधार, छूट की व्यवस्था और प्रवर्तन की सीमाएं अभी स्पष्ट नहीं हैं।
Africanews के अनुसार, पेरिस पुलिस ने रिपब्लिक स्क्वेयर और ले हॉल शॉपिंग क्षेत्र में रात का कर्फ्यू लागू किया, जिससे प्रतिबंध दोनों स्थानों पर केंद्रित किए गए। कर्फ्यू सोमवार रात 11 बजे से मंगलवार सुबह 6 बजे तक रहेगा; रात 8 बजे से दोनों जगहों पर सभा और प्रदर्शन प्रतिबंधित होंगे। पुलिस का कहना है कि इसका उद्देश्य लोगों और संपत्ति की सुरक्षा तथा हिंसा और लूटपाट के जारी रहने को रोकना है।
हिंसा का असर कर्फ्यू क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। उसी रिपोर्ट के अनुसार, हिंसक घटनाएं अब पूरे फ्रांस में फैल चुकी हैं; कई नगरपालिका कार्यालय, सार्वजनिक भवन और हजारों दुकानें लक्ष्य बनीं, जबकि ले हॉल शॉपिंग क्षेत्र में लूटपाट हुआ। कर्फ्यू को उन दो स्थानों तक सीमित रखना, जहां हिंसा और लूटपाट हो चुका था, एक लक्षित कदम है और इसकी प्रभावशीलता भी केवल इन्हीं दो स्थानों तक है; यह स्थानीय नियंत्रण अकेले यह साबित नहीं करता कि देशव्यापी हालात नियंत्रण में आ गए हैं।
सोमवार शाम दोनों स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए। उन्होंने लोगों से अन्य मार्ग अपनाने और आस-पास रहे लोगों की पहचान जांचने के निर्देश दिए; ले हॉल के ऊपर से पुलिस हेलीकॉप्टर उड़ा। रिपोर्ट में कहा गया कि सड़कें अधिकतर खाली और शांत थीं। यह कर्फ्यू लागू होने के तुरंत बाद की स्थिति है, पर अकेले इससे यह नहीं साबित होता कि रोकथाम प्रभावी रही: निवासी भी जोखिम से बचने के लिए इलाका छोड़ सकते हैं। वास्तव में हिंसा का जोखिम कम हुआ या नहीं, यह जानने के लिए प्रवर्तन रिकॉर्ड और आगे के घटनाओं के आंकड़े चाहिए।
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबैस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार को कहा कि कर्फ्यू “बहुत सीमित” और “स्थानीय” होना चाहिए। स्थान और समय की दृष्टि से मौजूदा व्यवस्था वाकई सीमित है; लेकिन सभा और प्रदर्शन पर प्रतिबंध दोनों निर्धारित क्षेत्रों में रात 8 बजे से लागू होता है, जो रात 11 बजे शुरू होने वाले कर्फ्यू से तीन घंटे पहले है। कम से कम रिपोर्ट में बताए गए अनुसार, यह केवल उन लोगों तक सीमित नहीं है जिन्हें हिंसा में भागीदार माना गया है। सामान्य सभा को प्रतिबंधित करना और ठोस हिंसक कार्यों के लिए जवाबदेह बनाना राज्य हस्तक्षेप के समान स्तर के उपाय नहीं हैं। सार्वजनिक सुरक्षा को कारण बताकर सामान्य सभा पर प्रतिबंध लगाने के लिए यह बताना आवश्यक है कि क्या कोई अधिक सटीक और कम हस्तक्षेप करने वाला विकल्प मौजूद है, और प्रतिबंध कब हटाया जाएगा।
मौजूदा रिपोर्ट यह नहीं बताती कि कर्फ्यू किस कानून के आधार पर लगाया गया, किन व्यक्तियों या गतिविधियों को छूट मिलेगी, पुलिस प्रवर्तन की सीमाएं कैसे तय करेगी, या किसी को गिरफ्तार या मुकदमे में लाया गया या नहीं। जानमाल और संपत्ति के नुकसान के आंकड़े भी गायब हैं। ये जानकारी की कमियां सीधे तौर पर आवश्यकता और अनुपात से जुड़ी हैं: क्या कानूनी प्राधिकरण वैध है, क्या प्रतिबंध मौजूदा जोखिम से आगे जाते हैं, क्या छूट और प्रवर्तन रिकॉर्ड अत्यधिक प्रवर्तन को रोकने के लिए पर्याप्त हैं, और निवासियों व प्रदर्शकों ने वास्तव में किन प्रतिबंधों का सामना किया।
रिपोर्ट ने इस हिंसावाद को “फ्रांस में वर्षों में सबसे गंभीर” बताया, लेकिन पुलिस या सरकार के आंकड़ों की कोई परिभाषा या आधार नहीं दिया गया। खाली सड़कें केवल उस रात की तत्काल स्थिति बताती हैं; कानूनी आधार, प्रवर्तन रिकॉर्ड और प्रतिबंधों की लागत ही यह तय करने के लिए अहम हैं कि किसी सुरक्षा उपाय में समीक्षा योग्य अनुपात की सीमा है या नहीं। “बहुत सीमित” का राजनीतिक कथन इन सत्यापन योग्य संस्थागत शर्तों की जगह नहीं ले सकता।
अभी कोई टिप्पणी नहीं। चर्चा शुरू करें।